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  • खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का सामान्य परिचय व उनकी प्रमुख शिक्षाएं व दरगाह और उर्स

     खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती

    खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती दरगाह अजमेर शरीफ

    खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती कि सामान्य जानकारी

    • खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती इनका यह पुरा नाम है
    •   इनका जन्म 1114 से 1143 ई के बीच में ईरान के सिस्ताना क्षेत्र में हुआ था
    •  इनके पिता का नाम हजरत गयासुद्दीन
    •  माता का नाम बीबी उम्मुलवर था
    •  यह पैगम्बर मुहम्मद साहब के वंशज माने जाते हैं
    • इनका इंतकाल वर्ष 1236 ई में अजमेर में हुआ था
    • इनकी पुरे विश्व प्रसिद्ध दरगाह अजमेर शरीफ में स्थित है
    • हर वर्ष यहां विश्व प्रसिद्ध एक मेला (उर्स) भरता है जहां देश विदेश से सभी धर्मों के लोगों आते हैं
    • इस्लामिक वर्ष के  सातवें महिने में रज्जब कि 1 से 9 तारिक तक उर्स भरता है
    • इस उर्स का झंडा भीलवाड़ा के गोरी परिवार द्वारा फहराया जाता है
    • गोरी परिवार द्वारा इस रस्म कि शुरुआत लाल मोहम्मद गोरी द्वारा सन 1944 मे कि गयी
    • इस रस्म के समय 25 तोपो कि सलामी दी जाती है
    • इस्लामिक वर्ष के हर महीने कि 6 तारिक को खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती कि छठी शरीफ मनाई जाती है
    • अजमेर दरगाह में दो देग (एक बड़ी देग व एक छोटी देग) है
    • इस दरगाह कि एक मुख्य बात यह दरगाह पुरी संगमरमर के पत्थर से बनी हुई है
    • यहां बताया जाता है कि सभी प्रकार कि मन्नत पूरी होती हैं
    भारत की धरती पर  सदियों से विभिन्न धर्मों संस्कृतियों भाषाओं और परंपराओं का संगम रही है जिसके कारण ही यहां भारत को अनेकता में ऐकता वाला देश कहा जाता है भारत के इतिहास में अनेक संतों सूफियों और महापुरुषों ने मानवता प्रेम भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। इन्हीं महान सूफी संतों में ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्हें प्रेम करुणा सेवा और इंसानियत का संदेश देने वाला महान सूफी संत माना जाता है। राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित उनकी दरगाह आज भी देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
    ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती को आमतौर पर ख्वाजा गरीब नवाज के नाम से भी जाना जाता है। गरीब नवाज का अर्थ है—गरीबों पर कृपा करने वाला या जरूरतमंदों का सहारा बनने वाला। उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य मानव सेवा और लोगों को आपसी प्रेम तथा भाईचारे की भावना से जोड़ना था। उन्होंने जाति धर्म अमीरी-गरीबी और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर इंसान को इंसान से प्रेम करने की शिक्षा दी।इनकि वजह से हि भारत में अनेक लोगों ने इनकि बातों व इनके कार्य को देखकर इस्लाम धर्म को अपनाया था
    ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का परिचय
    ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती भारतीय उपमहाद्वीप में चिश्ती सूफी सिलसिले के प्रमुख संतों में से एक थे। उनका जन्म लगभग 12वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। उनके जन्मस्थान के संबंध में विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों में अलग-अलग मत मिलते हैं लेकिन सामान्यतः उनका जन्म सिस्तान क्षेत्र के संजर से जोड़ा जाता है जिसकी जानकारी हमें अलग अलग इतिहासकारों कि अलग अलग पुस्तकें के माध्यम से मिलती है
    उनका बचपन एक धार्मिक वातावरण में बीता। बचपन से ही वे आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक शिक्षा की ओर आकर्षित थे। कहा जाता है कि कम उम्र में ही उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाकर आध्यात्मिक जीवन की ओर कदम बढ़ाया जहां पर उन्हें केवल सचाई के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया गया
    उनके जीवन में अनेक आध्यात्मिक गुरुओं का प्रभाव पड़ा उन्होंने इस्लामी धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ सूफी साधना का भी गहन अध्ययन किया। आगे चलकर वे चिश्ती परंपरा से जुड़े और इसी परंपरा को भारतीय भूमि पर व्यापक रूप से फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    चिश्ती सिलसिला और ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन
    चिश्ती सिलसिला सूफी परंपरा की एक महत्वपूर्ण शाखा है। इस परंपरा में प्रेम विनम्रता सहिष्णुता मानव सेवा और ईश्वर के प्रति समर्पण को विशेष महत्व दिया जाता है।
    ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने इस परंपरा की शिक्षाओं को भारत में जनसामान्य तक पहुंचाया उनका मानना था कि ईश्वर तक पहुंचाने का मार्ग केवल धार्मिक कर्मकांडों से नहीं बल्कि मानवता की सेवा और जरूरतमंदों की सहायता से भी होकर जाता है।
    उन्होंने लोगों को बताया कि मनुष्य को अपने हृदय में प्रेम और दया रखनी चाहिए। किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना दुखी व्यक्ति की सहायता करना और जरूरतमंद के काम आना  चाहे वह किसी भी प्रकार से हो भी एक महान धार्मिक कार्य है।

    विश्व प्रसिद्ध खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती कि दरगाह अजमेर

      खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का भारत में आगमन

    ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने आध्यात्मिक यात्रा के दौरान कई क्षेत्रों का भ्रमण किया था अंततः वे भारत आए और राजस्थान के अजमेर को अपनी आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाया उस समय अजमेर राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र था क्योंकि यहा पर गर्मी तथा शर्दि दोनों ऋतु में भी व्यक्ति आराम से रह सकता था तथा कि वातावरण भी शुद्ध व अच्छा था
    यहां अजमेर में उन्होंने आम लोगों के बीच रहकर सेवा और आध्यात्मिक संदेश का प्रचार किया उन्होंने लोगों को बाहरी दिखावे की बजाय अपने आचरण को शुद्ध करने और दूसरों के प्रति प्रेम रखने की प्रेरणा दी जिसमें कि हम एक दूसरे के लिए काम आ सके व किसी के भी प्रति हमे अपने मन को साफ रखना चाहिए
    उनका मानना था कि मनुष्य की महानता उसके जन्म धन या पद से नहीं बल्कि उसके अच्छे कर्मों और दूसरों के प्रति उसके व्यवहार से निर्धारित होती है यही विचार धीरे-धीरे लोगों के बीच लोकप्रिय हुआ और बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़ने लगे जैसे जैसे लोग उनके पीछे जुड़ते गए वैसे वैसे ही इन्होंने अपने विचारों तथा अपने नियमों का प्रचार प्रसार किया और लोगों को इनके विचार इतने अच्छे लगे कि भारत में अनेक लोगों ने इस्लाम धर्म को अपना लिया था

    खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती (गरीब नवाज) कि मुख्य शिक्षा बिंदु

    • मानव सेवा

    खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती जब भारत में आगमन हुआ तो इनकि यह शिक्षा बहुत अच्छी थी क्योंकि इस शिक्षा की वजह से हमारे यहां के लोगों ने इनके विचारो को देखा तथा इनके विचारो पर घोर किया और अमल भी किया जिसके मध्य से ही यहां पर अनेक लोगों ने इस्लाम धर्म को अपनाया था क्योंकि इन्होंने सबसे पहले यही बात करके दिखाई कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है मानव अगर किसी भी प्रकार से तकलीफ मे है और आप से जितनी हो सके उतना ही अधिक उसकी मदद करनी चाहिए जिससे कि उनकी यह निती देखकर लोगों को उनके प्रति एक विश्वास कि भावना बढ़ गई थी इसलिए इन्होंने कहा कि सब सेवा से बढ़कर मानव सेवा हि सर्वोत्तम सेवा हैं 

    • खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती कि मुख्य शिक्षा: प्रेम और भाईचारा 
    भारत के प्रसिद्ध सुफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती कि मुख्य शिक्षा प्रेम और भाईचारा से रहने कि थी क्योंकि इन्होंने जैसे जैसे अपना धर्म का प्रचार प्रसार किया वैसे वैसे लोगो के मन में इनके प्रति एक अलग ही भावना देखने को मिलने लगी जिसका एक मुख्य कारण यह भी था कि इन्होंने लोगो को आपसी भाईचारा व प्रेम से रहने व एक दुसरे कि सेवा करने के प्रति लोगों को जागरूक किया था इनका एक यही पैगाम था कि जितना ज्यादा हो सके उतना ही अधिक आप एक दुसरे के साथ रहो और एक दुसरे का सहयोग करो 
     
    •   खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती कि मुख्य शिक्षा साधारण जीवन और धार्मिक सद्भाव 
    खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती ने अपनी शिक्षा मे लोगो को साधारण जीवन जीने और धार्मिक सद्भाव से रहने कि भी प्रेरणा दी थी ख्वाजा साहब का संदेश किसी एक विशेष समुदाय तक सीमित नहीं था बल्कि उनकी दरगाह पर अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों का आना भारतीय समाज में उनके व्यापक प्रभाव को दर्शाता है तथा इससे यह भी देखने को मिलता है कि इन्होंने अपने जीवन में अपने विचारों से कितने लोगों को प्रभावित किया है यहां पर आने वाले सभी धर्मों के लोगों का आना यह भी प्रतित करता है कि इन्होंने एक अलग ही धार्मिक सद्भाव लोगों मे पैदा किया था 
     

    गरीब नवाज दरगाह

     खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती कि मुख्य शिक्षा: सभी धर्मों के लोगों मे एकता व घमंड/अहंकार से दुरी 

    भारत के प्रसिद्ध सुफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती कि मुख्य शिक्षा में यह भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है जिसमें कि लोगों को एक अलग ही मैसेज मिला था जिसमें कि मानव जीवन में कभी भी घमंड व अहंकार नहीं करना चाहिए क्योंकि समय का कभी भी पता नहीं चलता है यह कभी किसी मोड़ में आ सकता है ख्वाजा साहब गरीबों और असहाय लोगों के प्रति विशेष संवेदनशील थे जिसके कारण उन्हें गरीब नवाज की उपाधि मिली उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता और उन्हें भोजन उपलब्ध कराने जैसी परंपराओं को महत्व दिया उनका यही कहना था कि आप को किसी भी हालत में गरीब व असहाय लोगों की मदद करनी चाहिए 
    खाव्जा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती ने मनुष्य अहंकार और घमंड से दूर रहने की शिक्षा दी। उनके अनुसार आध्यात्मिक जीवन में विनम्रता का विशेष महत्व देखने को मिलता है ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने सादगी और संयम को महत्व दिया क्युकी उनकी शिक्षा इन्हीं माध्यम से हुई थी उनका जीवन भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रदर्शन से दूर था वे आत्मिक संतोष और सेवा को अधिक महत्वपूर्ण मानते थे जिसमें इन्होंने अपना पुरा जीवन ही लगा दिया था 
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